एक क़ाफ़िर ने एक बुज़ुर्ग से कहा कि, अगर आप मेरे 3
सवालोँ का जवाब दे दो तो मैँ अभी ईमान ले
आऊँगा और मुस्लमान हो जाऊँगा।
बुज़ुर्ग ने कहा: ठिक है पुछो।
क़ाफ़िर ने सवाल किया:
1. जब आपलोग हर काम'अल्लाह'
की मर्ज़ी से करते
हैँ, तो फिर इंसानो को ज़िम्मेदार क्यो मानते
हो?
2. जब शैतान आग से बना है तो दोज़ख़ की आग
उस
पर किस तरह असर कर सकती है? और
3. जब आपलोग को'अल्लाह'नज़र
ही नहीँ आता तो उसे महसूस करते
कैसे हो?
इस पर उस बुज़ुर्ग ने क़ाफ़िर को झल्लाकर एक
मिट्टी का ढेला उठाकर दे मारा। क़ाफ़िर दर्द
से तिलमिलाता हुआ एक क़ाज़ी के पास जाकर
बुज़ुर्ग के ख़िलाफ़ उसकी शिकायत दर्ज़ कर
दी।
क़ाज़ी ने बुज़ुर्ग से पुछा: जनाब, आपने
मिट्टी का ढेला आख़िर उस बेचारे
को क्योँ मारा?
बुज़ुर्ग ने कहा: मैनेँ इन्हेँ
ढेला नहीँ मारा बल्कि इनके
सवालोँ का जवाब दिया था।
क़ाज़ी ने कहा: वो कैसे?
बुज़ुर्ग ने जवाब दिया:
1. इनके पहले सवाल का जवाब ये है, की मैनेँ ये
ढेला'अल्लाह'की मर्ज़ी से मारा था,
तो फिर
ये मुझे ज़िम्मेदार क्योँ मान रहे हैँ।
2. इनके दूसरे सवाल का जवाब ये है, की इंसान
भी तो मिट्टी से बना है, तो फिर
मिट्टी के ढेले
ने इनपर असर कैसे किया। और
3. इनके तीसरे और आख़िरी सवाल
का जवाब ये है,
की जब इन्हेँ दर्द नज़र
नहीँ आता तो ये उसे महसुस
कैसे कर सकते हैँ?
इतना सुनकर वो क़ाफ़िर हैरत मेँ पड़ गया और
इस्लाम की सदाक़त पर ईमान ले आया....।
Saturday, 23 January 2016
Islamic
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