दुश्मने अहलेबैत पर शिद्दत कीजिये
बागियों की क्या मुरव्वत कीजिये
गैज में जल जाये खारजियों के दिल
या अली या अली की कसरत कीजिये
जो सादात का बेअदब गुस्ताख हो
उनकी तारीखी मरम्मत कीजिये
या हुसैन या हुसैन जा बजा
मिदहते सैय्यदुश् शोहदा कीजिये
जो सैयदों से जो उलझा नासीबी बदचलन
कुछ न फिर उसकी रीआयत कीजिये
अहलेबैत का मुहिब जो भी मिले
दिल से उसकी खूब इज़्ज़त कीजिये
अहादीस ए नबवी :
सल्लल्लाहु अलैहि व आलिही व सल्लम
मैं तुम में दो भारी चीज़ छोडे जाता हूँ
अल्लाह की किताब
और
मेरे अहलेबैत! मैं तुम्हे अपने अहलेबैत के बारे में अल्लाह
की याद दिलाता हूँ और उससे डराता हूँ। इस जुमले
को हुज़ूर अलैहिस्सलाम ने दो बार फ़रमाया।
(मिश्कात शरीफ प 568)
ऐ लोगो ! मैंने तुम्हारे दरमियान वो चीज़ छोड़ी है के
अगर तुम इसको पकडे रहोंगे तो कभी गुमराह न होंगे।
(मिश्कात शरीफ 569)
मेरे अहलेबैत तुम लोगो के लिए नूह अलैहिस्सलाम की
कश्ती की मानिंद है। जो शख्स कश्ती में सवार हुआ
उसने नजात पायी और जो कश्ती में सवार होने से
पीछे रह गया वो हलाक़ हुआ।
( मिश्कात शरीफ 573 )
ये सारे उसूल क़यामत तक के लिए है। जिसने समझ उसके
लिए दीनो दुनिया की कामयाबी है।
वफाशीआरि अहलेबैत के लिए वाजिब है कुल उम्मत
पर।
labbaik ya hussain
Saturday, 9 January 2016
Hussain
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