फजीलत-ए-खुत्बा-ए-जुम्मा....`♥हजरत अबु हुरैरा (रजी अल्लाहु अन्हु) से रिवायत है की,रसुलल्लाह! (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने इरशाद फरमाया--"जो शख्स अच्छी तरह वजु करता है फिर जुम्मा कीनमाज के लिए आता है खुब गौर से खुत्बा सुनता है, खुत्बे के दौरन खामुश रहता है।, तो इस जुम्मा से गुजीस्ता जुम्मा तक माजीद 3 दिन केगुनाह माफ कर दिये जाते है।,और जिस शख्स ने कंकरियो को हाथ लगया (यानी दौराने खुत्बा उसने खेलता रहा या चटाई कपड़ा वगैरह से खेलता रहा) तो उसने फजुल काम किया"(मुस्लिम, 1/283)`♥दुआ की गुजारिश है :-
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