सूरेह यासीन" -- फज्र के बाद पढ़ने से हर ख्वाहिश पूरी होती हे
"सूरेह वाकिया" -- मगरिब के बाद पढ़ने से कभी फाका नहीं आता
"सूरेह कौशर " -- दुश्मनो की दुश्मनी से बचाती हे
"सूरेह काफिरुंन" -- मौत के वक़्त कुफ़्र से बचाती हे
"सूरेह इखलाश" -- मुनाफ़िक़ात से बचाती है
"सूरेह फलक" -- हादसों से बचाती हे
"सूरेह नास" -- बसबसो से बचाती हे
ये तोहफा दुसरो को भी दे क्योंकि अल्लाह अज्जओ जल तोहफा देने वालो को पसंद फरमाता है. *आमीन
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